उत्तराखंड गांव ग्राम सम्मेलन चलो गांव की ओर

उत्तराखंड ग्राम सम्मेलन जून 2019 






मुझे अपने शब्दों को गहराई में लिखने का अंदाज तो मालूम नही मगर छोटी सी कोशिश है कि चंद शब्दों को अगर गहराई से सोचा जाए तो उत्तराखंड के गांव का पलायन उन बंजर पड़े मकान और खेत खलियानों को आबाद किया जा सकता है।
हम सभी की प्राथमिकता है रोजगार जो कि संभव नही और अगर रोजगार संभव नही तो क्या हम हर वर्ष में एक महीने की छुट्टी लेकर अपने गाँव मे नही रुक सकते रुकने का मकसद एक ही है कि हम सभी अपने गांव से जुड़े रहें हम जुड़ते हैं तो हमारी आने वाली पीढियां भी अपने पैतृक स्थान से जुड़ी रहेगी शायद हम कुछ इस तरह के प्रयासों पर आगे बढ़ कर भविष्य की दिशा तय कर सकते हैं।
1- सर्वप्रथम अपने गांव के प्रवासियों एवं ग्रामवासियों का एक संयुक्त  वाट्सएप ग्रुप बनाएं  तथा भावनात्मक रूप से सभी को ग्रुप से जोड़ें ।
2- सभी मिलकर ग्रामदेवता के मंदिर परिसर में प्रतिवर्ष ग्रामोत्सव मनाने के लिए निश्चित तिथि पर एकत्रित हों, इसके लिए मई -जून का महीना सबसे उपयुक्त रहेगा , प्रवासी सपरिवार ग्रामोत्सव में भाग लेने अपने गांव आएं।
3 - गांव आकर अपने ही घर पर रुकें यदि पैतृक घर जीर्ण -शीर्ण हो रहा है तो उसे प्राथमिकता के आधार पर सुविधायुक्त बनाएं ।
4- प्रवासी सामाजिक सहयोग के आधार पर अपने सामर्थ्य के अनुसार ग्रामदेवता के मंदिर  सौंदर्यीकरण में , प्राक्रतिक जल स्रोत के संरक्षण में , गरीब कन्या के विवाह में , निर्धन छात्रों की छात्रवृत्ति में , असहाय विधवाओं की सहायता आदि रचनात्मक सेवा कार्यों में अपना आर्थिक सहयोग प्रदान की परम्परा आरम्भ करें ।
स्मरण रहे संशाधनों के लिए हम लोग गांव से बाहर गए थे अब समर्थ हुए हैं तो उसका लाभ गांव को मिलना चाहिए ,धीरे धीरे अपने गांव लौटने की भी मानसिकता हमे बनानी होगी ।

5-सरकारी निर्भरता की मानसिकता के चलते भी निराशा के कारण युवाओं मेंपलायन की प्रवृत्ति  बढ़ी है जब कि अन्य प्रदेशों की श्रम शक्ति के लिए वहां पर्याप्त रोजगार है ।
ग्रामोत्सव के बाद ग्रामविकास समिति का गठन हो जो गांव की आवश्यकताओं की प्राथमिकता तय करे उस पर सभी मिल कर प्रयास करें ।अंत मे किसी एक तीर्थयात्रा को भी अपने कार्यक्रम में स्थान दें ।
हमारा प्रयास है कि एक वर्ष में 10 लाख उत्तराखण्डियों को ग्रामोत्सव के निमित्त  बुलाने की योजना का प्रयास किये जायें इससे राज्य में करोड़ों रुपयों का अदृश्य निवेश होगा स्वावलम्बन बढ़ेगा ।लौटते समय यहां के उत्पाद खरीद कर ले जाए ऐसी अपेक्षा है ।
" मेरा गांव मेरा तीर्थ "योजना के अंतर्गत प्रवासी पंचायत और ग्रामोत्सवों की श्रृंखला शुरू की जाए , इस अभियान के अनेक सुखद परिणाम मिल सकते हैं , उत्तराखंड में खाली हो रहे गांव पुनः आबाद हो सकते हैं। आइए सहयोग , स्वावलम्बन और स्वाभिमान  से हम देवभूमि को एक आदर्श राज्य के रूप में विकसित करें, पलायन को वरदान भी सावित किया जा सकता है , मात्र दृष्टिकोण बदलने की आवश्यकता है । जो यहां रुक सकते हैं वे अधिक से अधिक रुक कर  देवभूमि  के स्वर्गिक वातावरण  का असीम आनंद प्राप्त करें। ग्राम के विकास से देश का विकास है।
 
        

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