मै इतना जनता हूं की प्रकाश चन्द्र सारंगी जैसे ईमानदार और साधारण जीवन जीने वाले मंत्रियों को चुन के मोदी जी ने दिखा दिया कि मेरा भारत बदल रहा है। मगर वही आरएसएस ने निशंक जैसे भ्रष्ट और गुटबाजी वाले नेता निशंक का चयन करके दुखद समाचार दिया है। निशंक का उत्तराखंड कुंभ घोटाला किसी से छुपा नहीं है और नहीं निशंक द्वार खंडूरी जैसे ईमानदार नेता को हराने की गुटबाजी भी किसी से छुपी नहीं है। बीजेपी को सोचना होगा निशंक ने उत्तराखंड में बीजेपी को हाशिए पर लाकर खड़ा कर दिया था। मगर आज उसी इंसान का केंद्रीय मंत्री बन कर चुना जाना भय का संकेत है। अगर आने वाले समय में निशंक की वजह से मोदी सरकार पर एक भी दाग लगता है तो बीजेपी पूरे भारत में हाशिए पर खड़ी ना हो जाए जनता का वोट मोदी को मिला है और उनकी ईमानदार छवि के कारण लोगों ने उनसे अपार भरोसा जताया एक मजबूत सरकार बनाकर डर है निशंक के आने से माहौल बदलने में समय नहीं लगता एक ओर सारंगी जैसे साधारण व्यक्तित्व के धनी जो बिना किसी के नाम से निर्दलीय रह कर भी एक विधायक का चुनाव भी जीते है इससे स्पष्ट होता है कि सारंगी को मोदी जी के नाम से वोट तो मिले होंगे मगर उनका अपना भी कोई मजबूत जनाधार होगा निशंक को मंत्रिमंडल से दूर रखना ही मोदी जी के और इस सरकार के लिए बड़ा कदम होगा देखना है मोदी जी इनके पुराने कारनामे कब तक जानकारी शामिल कर सकते है।
छात्रायें कब तक अपने शहर में एग्जाम ना होने के कारण अपने आपको रोकेंगी।
कोटद्वार जिला पौड़ी गढ़वाल उत्तराखंड में कई सालों से चल रही एसएससी व बैंक की परीक्षाओं और उत्तराखंड की सभी प्रकार की परीक्षाओं में छात्राओं को अपने शहर। कोटद्वार से दूसरे शहर में अपना एग्जाम देने जाना पड़ता है। ये कोटद्वार ही नहीं उत्तराखंड में हर जगह ऐसी व्यवस्था है। कई बार छात्राओं को देर रात में भी घर आते देखा है। इसी कारण से कई छात्राएं अपना एग्जाम छोड़ देती है। सिर्फ इसी अभाव से कि उनके दूसरे शहर में ठहरने के लिए कोई रिश्तेदार नहीं होते। अगर महिलाओं को आगे बढ़ाना व बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ के नारे पर उचित कदम उठाने है तो छात्राओं के लिए परीक्षा प्रणाली को बदलना जरुरी है अपने ही शहर में परीक्षाएं कराई जाए। जिससे हर छात्रा को एसएससी व सभी प्रकार के कॉम्पिटिशन एग्जाम में निडर होके आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।
मुद्दे बहुत है मगर सकरत्मक मुद्दों को कोई उठाना नहीं चाहता है। बाकी रही उम्मीद उत्तराखंड सरकार से तो वो हमने करनी ही छोड़ दी है यहां सरकारें आती है तो सिर्फ अपनी कुर्सी बचाने ऐसे कार्य करने से सरकार की एक दूरगामी सोच होगी अब देखना इतना है कि सरकार इसमें कितनी तीव्रता से कार्य करती है।केंद्र सरकार के पास एक पत्र लिख के भेजा जरूर है बस अब इंतजार इस प्रणाली के बदलने का है।
मुद्दे बहुत है मगर सकरत्मक मुद्दों को कोई उठाना नहीं चाहता है। बाकी रही उम्मीद उत्तराखंड सरकार से तो वो हमने करनी ही छोड़ दी है यहां सरकारें आती है तो सिर्फ अपनी कुर्सी बचाने ऐसे कार्य करने से सरकार की एक दूरगामी सोच होगी अब देखना इतना है कि सरकार इसमें कितनी तीव्रता से कार्य करती है।केंद्र सरकार के पास एक पत्र लिख के भेजा जरूर है बस अब इंतजार इस प्रणाली के बदलने का है।
चलो गांव की ओर
मेरा गाँव मेरा तीर्थ
आज ग्रामोत्सव बद्रीनाथ मंदिर प्रांगण ग्राम करघेत पल्ला सल्ट में बहुत ही सुंदर कार्यक्रम भागवत कथा का रहा जिसमे प्रवासी समाज के साथ ग्रामीण लोगो का योगदान बहुत महत्वपूर्ण रहा ग्रामवासियों के साथ ग्रामविकास समिति की चर्चा भी हुई जल्द ही समिति का निर्माण कर आगे ग्रामविकास के कार्य सभी के साथ किये जायेंगे यही प्रयास है
एक कदम
गाँव की ओर
आज ग्रामोत्सव बद्रीनाथ मंदिर प्रांगण ग्राम करघेत पल्ला सल्ट में बहुत ही सुंदर कार्यक्रम भागवत कथा का रहा जिसमे प्रवासी समाज के साथ ग्रामीण लोगो का योगदान बहुत महत्वपूर्ण रहा ग्रामवासियों के साथ ग्रामविकास समिति की चर्चा भी हुई जल्द ही समिति का निर्माण कर आगे ग्रामविकास के कार्य सभी के साथ किये जायेंगे यही प्रयास है
एक कदम
गाँव की ओर
सत्ता के लिए तुच्छ राजनीति धर्म पंथ में ड र फैला के कांग्रेस अपने आपको किसी एक धर्म का रखवाला मानती है
देश के राजनैतिक मूल्यों की ओर जब कभी भी ध्यान जाता है तो मिश्रित से भाव मन में पैदा होते हैं। देश कितने संघर्ष के बाद स्वाधीनता को प्राप्त हुआ, इस बात से सब विदित हैं।मूल्यों ,सिद्धांतों एवं आदर्श की बात करने वाले लोग बहुत कम सुनायी देते हैं, आख़िर ऐसा क्यों? राजनीति किस लिए की जानी चाहिए,ओर किस लीए की जा रही है ? सत्ता प्राप्ति ही राजनीति का उद्देश्य है क्या, या जनता एवं देश को दिशा दिखाने वाली बात भी राजनीति को करनी चाहिए? आज भी देश में करोड़ों लोग भूख,प्यास ,घर,शिक्षा,स्वास्थ्य के लिए व्याकुल हैं, रोज़गार जुटाने के लिए आतुर हैं,अनेक प्रकार से मनोभावनाएँ अनेक रूप में प्रकट होती हैं, सामाजिक आर्थिक विषमता के बीच जीवन संघर्ष कर रहा है, वातावरण विषाक्त हो रहा है, प्रशासन में काम कर रहे लोग किस आधार पर काम करते होंगे? नैतिक ज़िम्मेदारी के प्रति कोई संवेदनशील नहीं, शहरीकरण ने परिवारों को अलगाव वाद, एकाकी जीवन, स्वार्थ एवं संकीर्ण विचार से पोषित किया है,जिसके बहुत सारे दुष्परिणाम भी मिलते हैं।आख़िर कब हम एक सुसंस्कृत समाज के शिखर पर पहुँचेंगे? अकेले राजनैतिक लोगों से इसकी आशा करना व्यर्थ है। हम सबको स्वयं से पूछना चाहिए कि हमारा कर्तव्य क्या है-स्वयं के प्रति,परिवार के प्रति?समाज एवं देश के प्रति? बहुत रास्ते खुल जाएँगे हमारे लिए अपना श्रमदान देने के लिए। संसद में भी आदर्श, मूल्य एवं सिद्धांतों की बात करने वाले लोग होने चाहिये। देश के प्राचीन वैभव से प्रेरणा लेकर, ग़लतियों से सबक़ सीखकर भविष्य का भारत ऐसा होना चाहिए जहाँ सब शांति, प्रेम, भाईचारा का व्यवहार बनाकर आगे बढ़ें। धर्म के आधार पर कोई भेदभाव ना हो। आख़िर सबका एक ही रंग का रक्त है, सबकी भावना भी एक जैसी।धर्म अलग-अलग रूप में एक ही मूल बात कहना चाहता है-जियो ओर जीने दो,सम्पूर्ण विश्व एक परिवार है, क्योंकि एक ही धरती है, आसमान भी एक, एक ही पानी सब पीते हैं, एक ही प्रकार का खाते अन्न सब।एक ही हम सबका रब, वही कहलाता है जय श्री राम
आज आस है उन उत्तराखंडी प्रवासी भाई बहनों से जिन्होंने उत्तराखंड छोड़ दिया वो वापस आएंगे
पलायन को रोकने का पहला दायित्व आज उन उत्तराखण्डियों का है जिन्होंने पहले अपना गांव छोड दिया था , अब वे पहल कर अपनी कुड़ी - पुंगड़ी को संवार कर त्रुटि सुधार करें क्योंकि आजीविका के हमेशा के लिये देवभूमि से विमुख नहीं होना था
अन्यथा जो 10 -05 परिवार गांव में शेष बचे हैं उन्हें भी आने से कोई रोक नहीं सकता ।
हम समय रहते समाधान की ओर बढ़ें ।चलो गांव की ओर ।
देवपूजन / ग्रामोत्सव के साथ जन्म भूमि दर्शन
अन्यथा जो 10 -05 परिवार गांव में शेष बचे हैं उन्हें भी आने से कोई रोक नहीं सकता ।
हम समय रहते समाधान की ओर बढ़ें ।चलो गांव की ओर ।
देवपूजन / ग्रामोत्सव के साथ जन्म भूमि दर्शन
श्रद्धेय अटल जी का वो भाषण जो कांग्रेस के हर नेता को देखनी चाहिए
यूं तो अटल जी का हर भाषण शानदार होता था, लेकिन 1999 में लोकसभा में दिए गए इस भाषण को अटल जी के सर्वश्रेष्ठ भाषणों में से एक माना जाता है।
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क्या है सलमान के नये ट्वीट में और क्या पक रहा रहुलजी के मन में - सभी अपडेट्स पायें एनबीटी ऑनलाइन संस्करण में।
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उत्तराखंड के पौड़ी जिले में हो रहे पलायन को रोकने के लिए किसी ने भी सकारात्मक कदम नहीं उठाए
मेरा आज आपको पौड़ी जिले में हो हो चुके पलायन की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना है। किसी भी मुख्यमंत्री वा किसी भी नेतृत्व ने इस विषय को गंभीरता से नहीं लिया जब एक मुख्यमंत्री भी पौड़ी जिले से हो मगर सत्ता का सुख जनता के सुख से अधिक मायने रखता है आज हमारे गांव हो या आस पास के पूरे छेत्र में स्कूल नहीं है जब एक मुख्यमंत्री का बेटा एक बड़ी स्कूल से शिक्षा ले सकता है तो उस जनता का हक नहीं है कि एक अच्छी स्कूल से वो भी शिक्षा हासिल करे। त्रिवेंद्र सिंह जी भी उसी राह पर है जिस राह पर अभी तक सभी मुख्यमंत्री थे। उत्तराखंड मुख्यमंत्रीजी को सत्ता मोदी जी के नाम से मिली है और अगर सत्ता मिली है तो काम भी मोदी जी के जैसे होने चाहिए थे। चिंता का विषय यह है कि मुख्यमंत्री जी को इन सब समस्याओं को दूर नहीं करना इस बार जनता उनको भी इन पूरी समस्याओं से दूर करना चाहती है सत्ता से।
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