उत्तराखंड के पंचायत चुनाव में नए नियमो से नहीं लड़ सकेंगे कई प्रत्याशी चुनाव



उत्तराखंड में आगामी २०१९ पंचायत चुनाव में प्रत्याशियों के लिए शैक्षिक योग्यता और दो बच्चों का नियम लागू कर सकती है। यदि किसी प्रत्याशी के दो से अधिक बच्चे हुए तो वो चुनाव नहीं लड़ सकता। हालांकि इसके लिए समय सीमा तय की जाएगी।
हर पद के लिए सैक्षणिक योग्यता तय की जा रही है।
न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता दसवीं रहेगी। इसका प्रस्ताव पंचायती राज विभाग ने तैयार कर लिया है।
जिस पर सरकार अंतिम निर्णय ले सकती है।
पंचायती राज विभाग ने चुनाव में प्रत्याशियों के लिए शैक्षणिक योग्यता और दो बच्चों की सीमा का विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया है इस पर अंतिम निर्णय सरकार ने लेना है।
पंचायती राज सचिव d. सैंठील पांडियन ने इसकी पुष्टि की है।



होगा एक्ट में भी संशोधन
पंचायती राज एक्ट के विभाग संशोधन करने जा रहा है। मौजूदा एक्ट में कई लिपि और अन्य त्रुटियों के साथ कुछ अन्य दिक्कतें भी हैं जिन्हें दुरुस्त करने के लिए संशोधन प्रस्ताव तैयार किया गया है।
पौड़ी में होने वाली प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में एक्ट को संशोधित करने के प्रस्ताव पर मुहर लग सकती है

हालात ये हो गए हैं कि सहकारी बैंक के पेपर के लिए मेरठ जाना मजबूरी है या त्रिवेंद्र ही मजबुरी बन चुके है

जिला सहकारी बैंक का पेपर करने के लिए उत्तराखंड सरकार के पास अपने राज्य में जगह ना मिल पाने के कारण महिलाओं छात्राओं को भी मेरठ जाना त्रिवेंद्र का जाना तय कर सकता है उत्तराखंड सरकार का बेटी पढ़ाओ बेटी बढ़ाओ का यही नारा है उत्तरप्रदेश जाओ जो राजा प्रजा की मजबूरी बन जाए उस राजा को सत्ता से उखाड़ फेंकना ही प्रजा की भलाई का कार्य होता है।

2019 विश्व कप का महामुकाबला आज भिड़ेंगे भारत पाकिस्तान

2019 विश्व कप का महामुकाबला आज भिड़ेंगे भारत पाकिस्तान

भारत पाकिस्तान के बीच खिताबी भिड़ंत हमेशा से रोमांच और देश की प्रतिष्ठा के लिए सर्वोपरि होती है मैदान में २२ खिलाड़ी आपस में भिड़ते है मगर १अरब ५० करोड़ दर्शक मैदान के बाहर जुबानी जंग लड़ते है। अभी तक विश्व कप में भारत पाकिस्तान के बीच हुए ६ मुकाबलों में भारत ने ६ बार ये मुकाबला जीता है। इससे साफ जाहिर होता है कि दबाव के माहौल में पाकिस्तान की टीम कभी भी भारत के सामने नहीं टिक पाती। पाकिस्तान की टीम ने जिस तरह से दबाव में २०११ के विश्व कप के मुकाबले में अपने विकेट खोए वो पूरी दुनिया ने देखा है।
आज होने वाले मुकाबले में सबकी निगाहें विराट कोहली और बुमराह पर होंगी ये दोनों ही एक दुनिया का नंबर एक बैट्समैन है तो दूसरा नम्बर एक बॉलार भारत और इंग्लैंड इस विश्व कप मजबूत दावेदार मानी जा रही है। तो आज के मुकाबले में भी भारत ही सबकी फेवरेट मानी जा रही है।
वही दूसरी ओर शखर धवन के अंगूठे के फैक्चर से पूरी टीम के लिए परेशानी का सबब बनी है। तो दूसरी ओर पाकिस्तान राहत की सांस ले रहा होगा।

भारतीय टीम को आमेर को नजर अंदाज नहीं करना चाहिए २०१७ चैंपियन ट्रॉफी में आमेर ने भारत के चैंपियन बनने के सपने को खत्म कर दिया था।
सुनील गावस्कर और सचिन तेंदुलकर जैसे दिग्गज क्रिकेटरों की भारतीय टीम को सलाह है कि आमेर की गेंदों पर सुरु से ही प्रहार करना चाहिए जिससे पूरी पाकिस्तान टीम दबाव में आ सकती है।
भारत पाकिस्तान के बीच का मुकाबला दबाव का होता है कभी इस मुकाबले में रणनीति काम नहीं करती तो कभी दिलेरी काम कर जाती है दर्शक टीवी खोल के अपने घरों में कैद होना पसंद करेंगे या सड़कों पर आना पसंद करते है ये मुकाबला प्रारंभ होने के बाद ही साफ हो पायेगा।

हिन्दी से भाषा के तौर पर पूरे हिंदुस्तान से खुशबू आती है। मगर इसकी बाध्यता खत्म करना दुखद

हिन्दी भाषा नहीं, भावों की अभिव्यक्ति है। 
यह मात्रभूमि पर मर मिटने की भक्ति है।।
S.Badola

कुछ दिन पहले जारी हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे में हिन्दी की बाध्यता को खत्म करना बड़ा ही शर्मनाक फैसला रहा इस विचार के पक्ष और विपक्ष में आवाजें उठ रही है। उत्तर भारत के राज्यों में हिन्दी की अनिवार्यता को खत्म करने के विचार एक सुर में विरोध किया जाना उत्तर भारत में हिन्दी भाषा को अधिक महत्व देना है। वहीं दक्षिण भारत में इस फैसले का स्वागत किया जा रहा है।

गौरतलब है कि देश में अधिकतर राज्यों का बंटवारा भाषा के आधार पर किया गया है। और लंबे समय से गैर हिन्दी भाषा राज्यों में तीन भाषा सिद्धांत के तहत हिन्दी की अनिवार्यता को खत्म करने की मांग की जा रही थी। हिन्दी विरोध के कई तर्क बेहद ही हल्के और स्तरहीन नजर आते हैं। हिन्दी की शिक्षा का मकसद किसी भी स्थानीय भाषा को खत्म करने का नहीं था। जाहिर तौर पर इसका मकसद देश में एकता का एक सूत्र बने रहने से था। विविधताओं के बीच यदि एकता नहीं होती है तो आखिर में ये बिखराव और टकराव की वजह बनती है।
हिन्दी से भाषा के तौर पर पूरे हिंदुस्तान से खुशबू आती है। राष्ट्र के हितों को देखें तो हिन्दी भाषा हमारी एकता और अखंडता के लिए एक ढाल कि तरह है। अगर हम इस ढाल को ही कमजोर कर देंगे यकीनन एक दिन हमें इस बात का अफसोस होगा कि समय रहते सही कदम उठाए जाते तो  बेहतर होता राष्ट्र की सामूहिक चेतना का सवाल जब भी उठेगा हमें राष्ट्रीय भाषा के निर्धारण की अग्नि परीक्षा देनी होगी। राजनीति और अपने हितों को ध्यान में रखकर छेत्रवाद और भाषा को विवाद का मुद्दा बनाया जाना हमें हमारी संकुचित विचार से रूबरू कराता है। अगर हमारे अंदर राष्ट्रवाद या राष्ट्रहित के भाव है तो 
हमें छेत्रावाद की सुविधाओं से निकलकर राष्ट्र भाषा के मुद्दे पर आगे आना चाहिए। हिन्दी में ही वह क्षमता है। जो पूरे देश को एक सूत्र आईमें पिरो सके।
                   हिन्दी भाषा नहीं, भावों की अभिव्यक्ति है।
                   यह मात्रभूमि पर मर मिटने की भक्ति है।।

स्वास्थ्य विभाग द्युटी के नाम पर कतती है छुट्टियां

पौड़ी गढ़वाल के अन्तर्गत संगलकोटी में स्वास्थ्य विभाग द्वारा खोली गई शाखा में जम कर कट  रही हैं छुट्टियां काफी समय से हमारे द्वारा संग्नकोटी में स्थित स्वास्थ्य विभाग द्वारा कार्यरत इंदु देवी को ए एन एम के पद पर ग्रामीण लोगों की मदद के लिए संगलकोटी में मौजूद किया गया है मगर अपने पद की गरिमा को भूलते हुए इनके द्वारा छुट्टियों में दिन कटते हैं। पता करने पर इंदु देवी अपने निवास स्थान कोटद्वार में ही रहती है। हालात ये हैं कि विभाग में ताला लटका मिला रहता है और एक हफ्ते बाद रजिस्टर में साइन हो जाते है। कुछ ऐसे विवादास्पद लोगों के कारण उत्तराखंड के भविष्य पर भी सवाल है जो सरकारी विभाग में नौकरी मिलते ही खुद ही सरकार बन जाते है। संगलाकोटी में जब भी कभी देखा जाएगा तो इंदु देवी अनुपस्थित रहती है।
कुछ ग्रामीणों के द्वारा पिछले साल जिला न्यायधीश से शिकायत किए जाने पर इंदु देवी की काफी किरकिरी हुई थी बाकायदा न्यायधीश ने इनको पूरे बाजार में फटकार लगाई थी जिस कारण से इन्होंने कुछ समय अपनी नौकरी बचाने के लिए रोजाना ड्यूटी पर मौजूदगी दर्ज कराई मगर कुछ समय बीत जाने के बाद फिर से छुट्टियों कि बौछारें लगाई है।

ताड़केश्वर महादेव के रहस्य से अनजान लोग भूल गए झलकुंद और झलमहादेव को

    सुनील
ताड़केश्वर महादेव
कोटद्वार उत्तराखंड
सदियों से श्रद्धा का केंद्र रहे ताड़केश्वर महादेव की अदभुद शक्तियों को शायद आम श्रद्धालुओं को ना दिख पाए और आज तक कोई भी श्रद्धालु ताड़केश्वर महादेव के बारे में अधिक जानकारी नहीं ले पाए। मगर ताड़केश्वर महादेव को जब भी याद किया जाएगा या ताड़केश्वर महादेव मंदिर के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कर सके तो शायद इस रहस्य से भी पर्दा हट जाएगा कि दूसरी दुनिया भी ठीक हमारी धरती के नीचे या फिर आस पास ही कंही हमारे एक और दुनिया के दरवाजे खुलते हैं।


हम जब ये लिख रहे हैं तो बहुत से तथ्यों के साथ अपनी बात को मजबूती से रख रहे हैं शायद आपने आज तक हॉलीवुड फिल्मों में अधिकतर दूसरी दुनिया के बारे में देखा या सुना होगा मगर ये सत्य भी हो सकता है जब आप ताड़केश्वर महादेव के बारे में सच्ची श्रद्धा से देखने का प्रयास करेंगे। हम बात कर रहे है ताड़केश्वर महादेव के दर्शन के लिए जाना ही हमारा लक्ष्य नहीं लक्ष्य है देव दर्शन को आपके बीच रखने का।
क्या आप जानते है ताड़केश्वर महादेव में जो दूध चढ़ाया जाता है वो झलमहादेव में  में देखा जाता आया है झल महादेव की दूरी ताड़केश्वर महादेव से लगभग ५० किलोमीटर दूर है।
वही झलमहदेव जहां मान्यता है कि झलकुंड नदी गंगा के समान पवित्र मानी जाती है।

झलकुंड नदी वो नदी है । जिसको की माना जाता है ताड़केश्वर महादेव के पवित्र पैरों का स्थान है। झलकूंड नदी से ही दूसरी दुनिया के द्वार का रास्ता प्रारंभ होता है। हम ये बात तथ्यों के साथ कह रहे है। सदियों पहले ग्राम भांगलवान से ताड़केश्वर महादेव के विवाह के साक्ष्य मिलते हैं। कहा जाता है कि ताड़केश्वर महादेव को किसी गांव वाले ने नहीं देखा मगर देवी के साथ जो देखा गया वो एक काला कुत्ता हर किसी गांव वाले ने देखा कहते हैं वो कुत्ता महादेव ने अपना दूत भेजा था गांव वालों ने ही देवी को झल्कुंड के सामने बिदाई दी। इतिहास पुराना होता है मगर मिटता नहीं कहा जाता है कि देवी को सभी गांव वालों ने ढोल नगाड़े और एक दुल्हन कि तरह सम्मान के साथ झलकुड में समाहित होते हुए देखा था।

पुरानी मान्यताओं के हिसाब से ताड़केश्वर महादेव ने उसके बाद अपना स्थान ताड़केश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए स्थापित किया। कहा जाता है कि जब देवी से पूछा गया कि देवलोक कैसा है तो उन्होंने भी एक अलग दुनिया का वर्णन किया था। आम मनुष्य प्रकृति के आगे सून्य है। यही सोच कर के हम ताड़केश्वर महादेव के बारे में अधिक जानकारी तो आपको नहीं दे सकते मगर प्रकृति के द्वारा बनाई गई चीजों को हम झुठला नहीं सकते और इसी लिए ताड़केश्वर महादेव की इतनी मान्यता है मगर आज भी ना हमारी सरकार ना ही हमारे लोगों ने भगवान की इस धरोहर को उच्च स्तर पर लेजाने का कार्य नहीं किया झलकुंद और झल महादेव भी ताड़केश्वर महादेव के स्थान है इसे आप लोग जाने। और हम इन पवित्र स्थानों की देखभाल करके भगवान को हमेशा के लिए अमर रखें।

उत्तराखंड पर्यटन नहीं जाम का बना अड्डा यात्रियों को हो रही है परेशानियां

कोटद्वार उत्तराखंड 
पर्यटन सीजन में उत्तराखंड राज्य रोजाना हांफ रहा है। क्या हरिद्वार, नैनीताल और चारधाम यात्रा हर रूट पर जाम से यात्री बेहाल हैं। चार दिन बाद होने वाले गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी के पर्व के साथ ही वीकेंड की भारी भीड़ से शनिवार को हरिद्वार फिर हांफने लगा। पुलिस प्रशासन द्वारा परिवर्तित यातायात प्लान लागू किए जाने के बावजूद हाईवे पर जाम से निजात नहीं मिल पाई। जाम का आलम यह था कि कई जगह यात्री गाड़ी छोड़कर पैदल ही चलने लगे। बैरागी कैंप समेत कई अन्य स्थानों पर खाली जगह पार्किंग में तब्दील कर दी गई हैं

मंगलौर से रुड़की तक भीषण जाम ने यात्रियों के पसीने छुड़ा दिया। सुबह करीब नौ बजे जैसे ही चक्का जाम होने की स्थिति पैदा हुई तो पुलिस ने वाहनों को वाया लंढौरा लक्सर होते हुए भेजना शुरू कर दिया। इससे दोपहर 12 बजे तक मंगलौर चौक पर भारी अफरातफरी की स्थिति रही। दूसरी ओर, दिल्ली से आने वाले वाहनों को नारसन से भी डायवर्ट करना शुरू कर दिया गया। तब जाकर दोपहर बाद दिल्ली हरिद्वार हाईवे पर यात्रियों ने राहत की सांस ली।

वहीं गढ़वाल में शासन-प्रशासन की ओर से हर साल चारधाम यात्रा की तैयारियों को लेकर छह माह पूर्व से ही बंद कमरों में बैठकों का दौर शुरू हो जाता है। यात्रा शुरू होने से चार माह पूर्व अधिकारी धामों में तैयारियों का जायजा लेने के लिए भी पहुंचते हैं, लेकिन यात्रा के चरम पर पहुंचते ही सारी तैयारियां धरी की धरी रह जाती है। देश-विदेश से पहुंचने वाले तीर्थयात्रियों व पर्यटकों को जाम, पेट्रोल-डीजल, एटीएम से पैसा नहीं होने, बदहाल सड़कें, स्टेंड पोस्ट, शौचालय जैसी मूल समस्याओं से जूझना पड़ता है। इस बार भी ऐसे ही हाल हैं।

इस बार चारधाम यात्रा में उमड़ रही भीड़ के बीच उत्तरकाशी में डीजल-पेट्रोल की आपूर्ति व्यवस्था लड़खड़ा गई है। यमुनोत्री एवं गंगोत्री यात्रा मार्ग पर कम संख्या में पेट्रोल पंप होने और इनमें भी आए दिन डीजल पेट्रोल खत्म होने के कारण तीर्थयात्रियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इन अव्यवस्थाओं से प्रशासन की यात्रा तैयारियों की पोल खोलकर रख दी है। रोजाना करीब 10-10 हजार तीर्थयात्री यमुनोत्री एवं गंगोत्री धाम पहुंच रहे हैं। चारधाम यात्रा के दो प्रमुख धाम जिले में मौजूद होने के कारण यात्री वाहनों का सर्वाधिक ठहराव उत्तरकाशी में ही है, जिससे यात्री वाहनों को ईंधन की ज्यादा आवश्यकता पड़ती है।

बदरीनाथ व हेमकुंड यात्रा मार्ग पर डीजल व पेट्रोल की किल्लत यात्रियों के लिए समस्या बनी हुई है। अधिकांश पेट्रोल पंपों पर सीमित पेट्रोल व डीजल दिया जा रहा है। बदरीनाथ व हेमकुंड यात्रा मार्ग के प्रमुख पड़ाव जोशीमठ में डीजल व पेट्रोल के लिए मारामारी मची हुई है। यहां स्थित दोनों पेट्रोल पंपों पर पिछले दो दिन से तेल की भारी किल्लत बनी हुई है, जिससे पेट्रोल पंपों पर वाहनों की लंबी लाइन लगी हुई है। पेट्रोल पंप मालिक लालमणि सेमवाल का कहना है कि टैंकरों की संख्या सीमित है, लेकिन यात्रियों की संख्या अत्यधिक बढ़ गई है। जिससे यह समस्या आ रही है। 

जोशीमठ में यात्रा मार्ग पर अधिकांश बैंकों के एटीएम में यात्रियों को धनराशि उपलब्ध नहीं हो पा रही है। यात्री कैश के लिए एक एटीएम से दूसरे एटीएम के चक्कर काट रहे हैं। जनपद के लीड बैंक अधिकारी जीएस रावत ने बताया कि पूरे चमोली में 69 एटीएम हैं, जिनमें  करीब पांच करोड़ प्रतिदिन डाला जाता है। उधर, जोशीमठ में विभिन्न बैंकों के 10 एटीएम में से मात्र तीन ही काम कर रहे हैं। अन्य किसी एटीएम में पैसे नहीं हैं, तो कोई खराब चल रहा है। वहीं बदरीनाथ धाम में दो एटीएम हैं, जिसमें से केवल एक ही एटीएम कार्य कर रहा है।




पौड़ी जिले के अन्तर्गत लक्ष्मण झूला सिलोगी में कार के खाई में गिरने से चार की दुखद मौत

लैंसडौन तहसील के अंतर्गत लक्ष्मण झूला-सिलोगी मोटर मार्ग में कार के खाई में गिरने से दो बच्चों सहित चार लोगों की मौत हो गई। तीन मृतक एक ही परिवार के हैं। 
बताया जा रहा है कि कल शाम पौड़ी गढ़वाल के पौखड़ा ब्लॉक से देश बंधु सिंह नेगी अपने भतीजे और भतीजी के साथ कार से देहरादून की तरफ जा रहे थे। कार को चालक कुलदीप सिंह रावत चला रहा था। 
इस बीच रास्ते में बड़ेथखाल में चालक कार संख्या UK15A 6453 पर नियंत्रण खो बैठा और कार करीब 150 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। इससे चारों की मौत हो गई। हादसे का पता रात को नहीं चल पाया। बताया जा रहा है कि देर रात देहरादून नहीं पहुंचने पर परिजनों ने देश बंधु सिंह से संपर्क किया, लेकिन बात नहीं हो सकी। 
इस पर आज सुबह भी उनसे फोन से संपर्क करने का प्रयास किया गया। इसी बीच सिलोगी के लोगों ने खाई में कार गिरी देखी तो लैंसडौन और लक्ष्मणझूला पुलिस को इसकी सूचना दी। इस पर पुलिस मौके पर पहुंची और खाई से चारों के शवों को बाहर निकाला गया। 
मृतकों के नाम 
1-देश बंधु सिंह नेगी (60 वर्ष) पुत्र स्वर्गीय रिजाब सिंह नेगी निवासी ग्राम मेल गांव, पोखडा ब्लॉक जनपद पौड़ी गढ़वाल। 
2- कुलदीप सिंह रावत (42 वर्ष) पुत्र स्वर्गीय श्री रेवत सिंह रावत निवासी रिठाखाल जनपद पौड़ी गढ़वाल। 
3-कुमारी कोमल (11वर्ष) पुत्री स्वर्गीय विश्व बंधु सिंह नेगी निवासी मेल गांव, ब्लॉक पोखडा जनपद पौड़ी गढ़वाल। 
4-अभिनव उर्फ सोनू (7 वर्ष) पुत्र स्वर्गीय श्री विश्व बंधु सिंह नेगी। 

अंगणी की छात्रा ने दसवीं में 96% अंक प्राप्त कर किया नाम रोशन


अंगणी गांव की मेधावी छात्रा शेफाली चौहान ने पंजाब राज्य शिक्षा बोर्ड द्वारा संचालित 10वीं की परीक्षा में 96 प्रतिशत अंक हासिल कर गांव का नाम रोशन किया है। इस उपलब्धि एक लिए अंगणी ग्रामवासी समूह (AGS) द्वारा अंगणी ग्रामोत्सव के दौरान प्रतिभावान छात्र-छात्रा सम्मान प्रदान सम्मानित किया जायेगा।
बिचला बदलपुर के अंगणी निवासी सतवीर सिंह चौहान अबोहर, जिला फाजिल्का-पंजाब की एक ट्रांसपोर्ट कंपनी के ड्राइवर हैं और परिवार सहित अबोहर में रहते हैं। ड्राइवर पिता और गृहणी माता श्रीमती शांति चौहान की तीन पुत्रियों में सबसे बड़ी पुत्री शेफ़ाली चौहान आरंभ से ही पढ़ाई में अच्छी रही है। अबोहर के एशियन स्कूल में शिक्षा हासिल करने वाली शेफ़ाली आरंभिक कक्षाओं में भी हमेशा ही अव्वल रही। कक्षा 9 में भी शेफ़ाली ने अपनी कक्षा सर्वोच्च स्थान हासिल किया था।
इस साल शेफ़ाली पंजाब राज्य शिक्षा बोर्ड द्वारा संचालित 10वीं की परीक्षा में सम्मिलित हुई। विद्यालय के साथ घर पर स्वाध्याय करने वाली शेफ़ाली ने पढ़ाई के लिए कभी ट्यूशन का सहारा नहीं लिया और अपनी लगन से दसवीं की परीक्षा में शेफ़ाली ने गणित 100 व विज्ञान 99 अंक हासिल किए, जबकि हिंदी 97, पंजाबी में 150 में से 145 और अंगेजी व सोशल साइंस में 92-92 अंक प्राप्त किये। शेफ़ाली अबोहर (जिला फाजिल्का) में सर्वोच्च स्थान पर रही।
शेफ़ाली की इस उपलब्धि का समाचार पाकर अंगणी ग्रामवासियों ने हर्ष प्रकट लिया है। गांव की होनहार बेटी ने पंजाब शिक्षा बोर्ड में उच्च स्थान पाकर गांव का नाम रोशन किया है।
अंगणी ग्रामवासी समूह की गत दिवस गांव में हुई बैठक में ग्रामोत्सव में सम्मिलित होने आये श्री गौर सिंह चौहान में उक्त जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शेफ़ाली अपने परिवार के साथ ग्रामोत्सव में भाग लेने आएंगी। बैठक में एक प्रस्ताव पारित कर पंजाब राज्य शिक्षा बोर्ड में उल्लेखनीय प्रदर्शन कर पर कुमारी शेफ़ाली चौहान और जवाहर नवोदय विद्यालय, खैरासैंण के लिए चयनित होने पर गांव की ही अन्य छात्रा कुमारी प्रिया चौहान को प्रतिभावान छात्र-छात्रा सम्मान-2019 प्रदान करने का निर्णय लिया गया। दोनों मेधावी छात्राओं को यह सम्मान चतुर्थ अंगणी ग्रामोत्सव के दौरान प्रदान लिया जाएगा।

कप्तान कोहली के पक्ष में सचिन कही ये शानदार बातें, धौनी को बताया टीम के लिए अहम



भारतीय क्रिकेट टीम को इस विश्व कप में खिताब की जीत का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। अब कप्तान के तौर पर विराट कोहली की यहां पर असली परीक्षा होनी है। इससे पहले यानी आइपीएल में विराट की कप्तानी काफी खराब रही थी और उनकी टीम का बुरा हाल हुआ था। विराट की कप्तानी को लेकर टीम इंडिया के पूर्व बल्लेबाज सचिन ने कहा कि हमें आइपीएल और भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की कप्तानी को लेकर तुलना नहीं करनी चाहिए। क्रिकेट के दोनों प्रारूप पूरी तरह से अलग-अलग हैं। एक टी 20 है जहां टीम में कई विदेशी खिलाड़ी होते हैं तो दूसरा ऐसा प्रारूप है जहां सारे भारतीय खिलाड़ी हैं। जब बात कप्तानी की आती है तो जाहिर तौर पर विराट पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। 
सचिन ने कहा कि धौनी का इस विश्व कप में अहम रोल होगा। विराट के लिए ये काफी अच्छी बात है कि उनके पास धौनी जैसे अनुभवी खिलाड़ी हैं। धौनी विकेट के पीछे से अपने अनुभव के जरिए टीम के लिए फायदेमंद होंगे। वो ऐसे स्थान पर खड़े होते हैं जहां से सब कुछ अच्छे से देख सकते हैं। वो विकेट के पीछे से मैदान को उसी तरह से देख सकते हैं जैसे एक बल्लेबाज देखता है। उनकी राय काफी अहम होगी क्योंकि उन्हें पता होगा कि पिच कितनी अच्छी है या बुरी, गेंद बल्ले पर रुककर आ रही है या फिर अच्छे से आ रही है। स्थिति जैसी भी होगी धौनी की सलाह काफी अहम रहेगी। 
सचिन ने टीम के शुरुआती तीन बल्लेबाजों पर निर्भरता के बारे में कहा कि मुझे ऐसा नहीं लगता कि पूरी टीम सिर्फ तीन बल्लेबाजों पर निर्भर हैं। अगर इस टूर्नामेंट में आगे जाना है तो सभी खिलाड़ियों को मिलकर अच्छा प्रदर्शन करना पड़ेगा। एक दो मैचों में कुछ खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं, लेकिन टूर्नामेंट में आगे जाने के लिए अन्य खिलाड़ियों की भी जरूरत होगी। सचिन ने कहा कि इस टूर्नामेंट से पहले अगर दुनिया ये कह रही है कि टीम इंडिया अच्छी टीम है तो ये अच्छी बात है। पर सबसे अहम बात ये है कि हम अपनी क्षमता के मुताबिक खेलें और अच्छा करें। 

अंग्रेजों के जमाने से चला आ रहा स्कूल हुआ बंद, जानिए वजह


एकेश्वर ब्लॉक के ग्वाड़खाल में अंग्रेजों के जमाने में खुला स्कूल बंद हो गया है। स्कूल बंद होने की वजह वहां छात्र संख्या का शून्य होना है।अंग्रेजी हुकूमत के दौर में खुले जिस प्राथमिक विद्यालय ग्वाड़खाल में कभी दो पालियों में पांच-पांच सौ बच्चे अध्ययन किया करते थे, वह छात्र संख्या शून्य होने के कारण इस बंद हो गया।
वैसे तो पौड़ी जिले के एकेश्वर ब्लॉक में इस वर्ष पांच प्राथमिक व एक उच्च प्राथमिक विद्यालय पर ताले पड़े, लेकिन सदी के गवाह रहे प्राथमिक विद्यालय ग्वाड़खाल का बंद होना सचमुच दुर्भाग्यपूर्ण है। इस विद्यालय के बंद होने का दोष जहां कुछ ग्रामीण सरकारी शिक्षा प्रणाली को दे रहे हैं, वहीं कुछ ग्रामीण इसे पलायन की परिणति बता रहे हैं।प्राथमिक विद्यालय ग्वाड़खाल की नींव वर्ष 1920 में रखी गई थी। मिट्टी-पत्थर से बने इस विद्यालय में तब ग्वाड़, थापली, सकिंडा, लछवाड़, बौंसली, बमोली, जैतोलस्यूं, देधार, नौदेणा, अमोठा व पाटीसैण के साथ ही कई अन्य गांवों के नौनिहाल शिक्षा ग्रहण करने आया करते थे।यह वह दौर है, जब क्षेत्र में सड़कें नहीं थी, लेकिन शिक्षा की ललक नौनिहालों को पैदल ही विद्यालय तक खींच लाती थी।छात्र-छात्राओं की बड़ी तादाद को देखते हुए तब विद्यालय दो शिफ्ट में चला करता था। सुबह की शिफ्ट में दूर-दराज के गांवों से आए बच्चे अध्ययन करते तो शाम की शिफ्ट में आसपास के गांवों के।ग्राम ग्वाड़ निवासी बुजुर्ग बचन सिंह बिष्ट बताते हैं कि विद्यालय में एक शिफ्ट में पांच सौ से अधिक बच्चे होते थे।देश आजाद हुआ और धीरे-धीरे पहाड़ों में जगह-जगह विद्यालय खुलने का सिलसिला शुरू हो गया। वर्तमान में तो प्रत्येक ग्रामसभा में प्राथमिक विद्यालय है।
ग्रामसभा बमोली के बुजुर्ग माणिक लाल चतुर्वेदी वर्तमान परिस्थितियों के लिए सरकारी नीतियों को जिम्मेदार मानते हैं। कहते हैं, उस दौर में शिक्षा गुणवत्तापरक हुआ करती थी और शिक्षकों को भी अपने कर्तव्य का बोध था।
नतीजा, बच्चों में शिक्षा पाने की ललक हुआ करती थी। लेकिन, आज स्थितियां पूरी तरह उलट हैं। सुविधाओं के बावजूद न शिक्षकों में पढ़ाने की ललक है और न विद्यार्थियों में पढ़ने की ही।
ग्रामीण भूपेंद्र सिंह थापा बताते हैं कि विद्यालयों के साथ ही अधिकारियों की फौज तो खड़ी कर दी गई है, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने को कभी गंभीर प्रयास नहीं किए जाते।
नतीजा, दो बच्चों पर दो शिक्षक होने के बावजूद पढ़ाई का स्तर ऊपर नहीं उठ पा रहा।

वैसे तो पौड़ी जिले के एकेश्वर ब्लॉक में इस वर्ष पांच प्राथमिक व एक उच्च प्राथमिक विद्यालय पर ताले पड़े, लेकिन सदी के गवाह रहे प्राथमिक विद्यालय ग्वाड़खाल का बंद होना सचमुच दुर्भाग्यपूर्ण है।वैसे तो पौड़ी जिले के एकेश्वर ब्लॉक में इस वर्ष पांच प्राथमिक व एक उच्च प्राथमिक विद्यालय पर ताले पड़े, लेकिन सदी के गवाह रहे प्राथमिक विद्यालय ग्वाड़खाल का बंद होना सचमुच दुर्भाग्यपूर्णइस विद्यालय के बंद होने का दोष जहां कुछ ग्रामीण सरकारी शिक्षा प्रणाली को दे रहे हैं, वहीं कुछ ग्रामीण इसे पलायन की परिणति बता रहे हैं।प्राथमिक विद्यालय ग्वाड़खाल की नींव वर्ष 1920 में रखी गई थी। मिट्टी-पत्थर से बने इस विद्यालय में तब ग्वाड़, थापली, सकिंडा, लछवाड़, बौंसली, बमोली, जैतोलस्यूं, देधार, नौदेणा, अमोठा व पाटीसैण के साथ ही कई अन्य गांवों के नौनिहाल शिक्षा ग्रहण करने आया करते थे।

सैमसंग M40 की लॉन्च से पहले लीक हुई स्पेसिफिकेशन्स

Samsung भारत में 11 जून को Galaxy M40 लॉन्च करने वाला है। फोन को लेकर लोगों में उत्सुकता बढ़ाने के लिए M40 के कुछ टीजर्स रिलीज किये गए हैं। इसी के साथ आधिकारिक तौर पर भी हैंडसेट को लेकर कुछ जानकारी दी गई है। फोन की कीमत Rs 20000 के आस-पास हो सकती हैं। इसका प्राइमरी रियर कैमरा 32MP और फ्रंट शूटर 16MP काSamsung भारत में 11 जून Galaxy M40 लॉन्च करने वाला है। फोन को लेकर लोगों में उत्सुकता बढ़ाने के लिए M40 के कुछ टीजर्स रिलीज किये गए हैं। इसी के साथ आधिकारिक तौर पर भी हैंडसेट को लेकर कुछ जानकारी दी गई है। फोन की कीमत Rs 20000 के आस-पास हो सकती हैं। इसका प्राइमरी रियर कैमरा 32MP और फ्रंट शूटर 16MP का होगा।
आज Samung M-सीरीज के इस फोन की कुछ और जानकारियां लीक हुई हैं। पहले आई काई अफवाहों के बाद भी ऐसा अनुमान है की फोन 5000mAh की बैटरी के साथ ना आकर 3500mAh की बैटरी के साथ आएगा। Galaxy M40 में 6.3 इंच Infinity-O डिस्प्ले, सेल्फी कैमरा के लिए लेफ्ट साइड पर पंच-होल आएगा। हैंडसेट में स्नैपड्रैगन 675 के साथ 6GB रैम और 128GB स्टोरेज दी जा सकती है। 32MP रियर कैमरा के साथ 8MP अल्ट्रा-वाईड शूटर और 5MP डेप्थ सेंसर दिया जाएगा। M40 हैंडसेट M सीरीज का ऐसा पहले फोन होगा, जो पहले दिन से ही एंड्रॉइड Pie पर काम करेगा। यह भारत में अपना ग्लोबल डेब्यू करेगा। वहीं M फॅमिली के अन्य सदस्य ऑनलाइन Amazon और Samsung के अपने स्टोर पर ऑफर किए जाएंगे।

उत्तराखंड को जातियों में बांटकर त्रिवेंद्र सिंह रावत सत्ता की दूसरी पारी के लिए सोच रहे है

उत्तराखंड की दशा और दिशा आज तक भी वही है जो दो दशक पहले थी। राजनीति यहां सर्वोपरि है। खंडूड़ी को छोड़ कोई मुख्य मंत्री निस्वार्थ भाव से देव भूमि को नहीं समझ पाया कभी किसी नेता ने ब्राह्मण जजमान में देव भूमि को बांटते हुए राजनीति की रोटियां सेकी हैं। तो आज बेहद दुखद समाचार यह मिला है कि कुछ जातिगत आधार पर ओबीसी के कोटे में इन जातियों को बांट दिया गया है। त्रिवेंद्र जी आपको वोट और जातियों ने भी दिया। आप उसी राजनीति को आगे बढ़ा रहे हैं जो आजादी के बाद इस देश को विरासत में मिली बाकी जातियों ने क्या बिगाड़ा आपका ये सवाल आपको सभी पूछेंगे। सवाल अगर ओबीसी कोटे में आने का होता है तो उन जातियों को छोड़ दिया गया जो जनसंख्या के आधार पर कम हैं। आपने देव भूमि को जाती गत बांटकर सबसे बड़ा अपराध किया है। जिन जातियों को आपने कम वोट बैंक समझकर एक भाई को दूसरे भाई से अलग करने का कार्य किया वही लोग आपको सत्ता से हटाने के लिए आगे बढ़ेंगे आपने यह सिद्ध कर दिया है कि आप राजनीत सत्ता के लिए कुछ भी कर सकते हैं