राजा भरत की जन्म भूमि कोटद्वार का नाम कण्वनगरी। कई सालों से अपनी पहचान ढूंढ रहा है ये क्रंऋषि की नगरी

उत्तर प्रदेश के शहरों के नये नामकरण से हवा उत्तराखंड तक पहुंच चुकी है. सम्पूर्ण गढ़वाल का प्रवेश द्वार कहलाए जाने वाला कोटद्वार शहर अब जल्द ही अपने नए नाम से पहचाना जाएगा. नगर निगम कोटद्वार द्वारा नए नामकरण के इस प्रस्ताव पर मुहर भी लग चुकी है.
पौड़ी जिले के सबसे बड़े शहर कोटद्वार के नए नामकरण की तैयारी जोरों शोरों पर है. कोटद्वार शहर अब अपने नए नाम ‘कण्वनगरी कोटद्वार’ के नाम से जाना जाएगा.
नगर निगम कोटद्वार द्वारा इस फैसले पर मुहर लगाई जा चुकी है. सरकारी दस्तावेजों और साइन बोर्ड में पुराने नाम को बदले जाने की प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी है.
कोटद्वार निवासियो का कहना कि कोटद्वार को सिर्फ गढ़वाल के प्रवेश द्वार से नहीं बल्कि कण्वघाटी के नाम से भी पहचान मिलनी चाहिए. देश का नाम जिस राजा के नाम पर पड़ा है, उनका जन्म कण्वाश्रम की धरती पर ही हुआ है’
हमने कोटद्वार के कण्वाश्रम के भविष्य को लेकर अपनी एक रिपोर्ट मे बताया कि ” कोटद्वार को पिछले 70 साल में क्या मिला तो कुछ नही हमारे देश भारत का नाम इसी शहर से मिला है मगर दुर्भाग्य की बात है कि आज कोटद्वार
अपने ही देश मे पहचान का मोहताज बन गया है। अब देखना ये होगा कि क्रंऋषि शकुंतला और राजा भारत की जन्मभूमि के अपने असली नाम मिलने से यहां की आबोहवा पर क्या असर पड़ेगा.
सिर्फ शहर का नाम बदलेगा या विकास नीतियां भी.

सैमसंग ने मोबाइल की दुनिया मे 2019 में हलचल मचा के रख दी है अब A90 आने वाला है

गैलेक्सी ए 90 में इसके डिजाइन से लेकर हार्डवेयर तक के बारे में बहुत कुछ कहा गया है। कई लोगों का मानना ​​है कि यह एक बढ़ते कैमरे के साथ आने वाला सैमसंग का पहला फोन होगा। पॉप-अप कैमरा फोन संख्या में बढ़ रहे हैं, ज्यादातर एक विशिष्ट डिजाइन के साथ जो सेल्फी कैमरे के लिए एक तंत्र वृद्धि को देखता है। लेकिन सैमसंग गैलेक्सी A90 के साथ कुछ अनोखा हो सकता है। क्या होगा अगर गैलेक्सी ए 90 एक घूमने वाले कैमरे के साथ एक स्लाइडर मैकेनिक को स्पोर्ट करे? यह एक नई अवधारणा वीडियो और एक कथित चश्मा लीक में सुझाया जा रहा है। सैमसंग गैलेक्सी ए 90 पॉप-अप रोटेटरी कैमरा के साथ आ सकता है। गैलेक्सी ए 90 का एक कॉन्सेप्ट वीडियो पिछले हफ्ते ही ऑनलाइन सामने आया था जिसमें पिछले लीक, अफवाहों और कॉन्सेप्ट रेंडर के आधार पर डिवाइस का 3 डी मॉकअप दिया गया था, जो कुछ समय पहले ऑलआउट कंपनी सैमसंग द्वारा पोस्ट किया गया था।
https://youtu.be/SJuCcewDUOo
वीडियो में गैलेक्सी ए 90 को एज-टू-एज, बेजल-लेस और नॉचलेस डिस्प्ले के साथ दिखाया गया है, जिसे सैमसंग नॉचलेस इन्फिनिटी डिस्प्ले कह सकता है।


एक पायदान या एक पंच-छेद के बिना, सैमसंग एक अभिनव पॉप-अप घूर्णन कैमरा तंत्र पर भरोसा करेगा। इसका मतलब यह है कि पीछे के पैनल का शीर्ष भाग जिसमें प्राथमिक दोहरी कैमरा सेटअप होता है, स्लाइडर की तरह ऊपर उठ जाएगा, और स्लाइडर में कैमरा मॉड्यूल स्वतंत्र रूप से पीछे से सामने की ओर घूमने में सक्षम होगा। यह घूमने वाला कैमरा डिज़ाइन दोहरे रियर कैमरों को अलग कैमरे के सेंसर की आवश्यकता को हटाते हुए सेल्फी कैमरों के रूप में फ्लिप और उपयोग करने की अनुमति देता है। डिजाइन निश्चित रूप से कुछ ऐसा है जिसे हमने पहले नहीं देखा है, लेकिन इसके फायदे और नुकसान हैं। एक बात के लिए, घूर्णन कैमरा डिज़ाइन का मतलब है कि आप सेल्फी के लिए एक शक्तिशाली प्राथमिक कैमरा का उपयोग कर पाएंगे। वीबो पर इस हफ्ते एक लीक के अनुसार, गैलेक्सी ए 90 में 48 एमपी डुअल कैमरा सेटअप होगा, जिसमें शायद सोनी आईएमएक्स 586 सेंसर का उपयोग किया जाएगा। तो घूमने वाला कैमरा सिस्टम आपको इस अल्ट्रा विस्तृत 48MP कैमरा को सेल्फी के लिए उपयोग करने देगा, जो बहुत अच्छा लगता है, अगर यह सच है। इस डिजाइन का एक नुकसान यह है कि अब हमारे पास एक के बजाय दो चलने वाले हिस्से हैं, जिससे नुकसान होने का अधिक खतरा है। वीबो पर स्पेक्स लीक ने कॉन्सेप्ट वीडियो में दिखाए गए पॉप-अप रोटरी कैमरा डिज़ाइन को दोहराया, डिजाइन का सुझाव अंतिम है, लेकिन आपको अभी भी इसे एक चुटकी नमक के साथ लेना चाहिए। टिपस्टर ने गैलेक्सी A90 के कुछ प्रमुख स्पेक्स भी पेश किए।

कांग्रेस पार्टी को जमीन से ऊपर उठाने के लिए पाकिस्तान परस्ती वायनाड में राहुल का नामांकन

बेहद डरावना : सबसे पहले मैं स्पस्ट करना चाहता हूं कि मेरी पोस्ट किसी राजनीतिक पार्टी के हित या खिलाफ नही है मैगर जो दृश्य आज मैंने अपनी आंखों से देखा है शायद वो दृश्य भयावह है ये हरे इस्लामिक झंडे वाला विडियो और फोटो कराची/लाहौर का नहीं, बल्कि राहुल गाँधी के वायनाड-केरल रोड शो का है।
हम अपने राजनीतिक फायदे के लिए किस हद तक चले जाते है शायद हम खुद भी ना जान पाए राजनीति से बड़ा देश है जब देश ही नही तो राजनीति कैसे होगी।

मैं उन लोगों से हाथ जोड़ कर विनती कर रहा हूँ जो लोग कांग्रेस को कई पीढ़ियों से वोट देते आ रहे हैं कि क्या अब समय आगया है कि हम अपना वोट राष्ट्र हित मे करें या खिलाफ हमारी आंखों के सामने सारा सत्य नजर आता है फिर भी हम आंख मूंद कर खड़े हैं तो बहविष्य की चेतावनियों को हमे गले लगाना होगा।
हम किसी राजनीतिक पार्टी का पक्ष या विरोध नही करते लेकिन राष्ट्र से प्रेम करते है अगर कोई भी पार्टी या व्यक्तिवत्व राष्ट्र विरोधी काम करे तो उसे जड़ से उखाड़ फेंकना हमारा कर्तव्य है।
आप आज के राहुल गांधी के नामांकन का वीडियो का लिंक भी देख सकते है आपको फेसबुक पर ये वीडियो मिल जायेंगे
https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=2069322076455693&id=100001337636385

उत्तराखंड के गांव पड़े खाली मकान में लटके ताले

हम अपने बेहतर बहविष्य की तलाश में अपने पूर्वजों की जमीन को छोड़ के आगे तो निकल आये हैं। लेकिन ये भूल गए कि शायद एक दिन हमे वापस लौट कर वापस जाना पड़े आज रतूड़ा गांव को देख कर यही लगता है कि ये धरती किसी दिन हमे कोसती होगी गांव के अधिकतर लोगों के मकान पर ताले लटके हैं। हम किसी पौधे पर पानी डालते हैं कि एक दिन बाद होकर हमे छांव देगा मगर अब वो पेड़ बन कर शहरों को छांव देने निकल पड़े हैं। रतूड़ा गाँव के अधिकांश लोग अच्छी नौकरियों पर बाहर पलायन कर चुके हैं। इसी गाँव के प्रशासन में सचिव श्री विनोद रतूड़ी जी की पहल रंग लायी और गाँव के विकास के लिए एक समिति का गठन किया गया रत्नेश्वर विकास समिति। सभी प्रवासी लोगों को गाँव मैं बुलाया गया। दिल्ली,देहरादून,चंडीगढ़ आदि जगहों से लोग गाँव आये। श्री शम्भू प्रसाद रतूड़ी,प्रकाश आदि रचनात्मक लोगों को जिम्मेदारी दी गई। गाँव में लोगों के साथ इन प्रवासी लोगों ने मीटिंग की। बंजर जमीन को आवाद करने, ख़ाली पड़े मकानों को संवार कर होम स्टे योजना से जोड़ने, बेनिताल पर्यटन को बढ़ावा देने,जंगल के बांज प्रजाति को बचाने  ,खेतों में साग भाजी का उत्पादन सामूहिक रूप से करने व गुणवता शिक्षा के उत्थान के लिए प्रस्ताव पारित किये गये। यह भी तय हुवा की हर ब्यक्ति साल में एक बार अपने बच्चों सहित गाँव जरूर आयें। लगता है ऐसी पहल से ही बदलाव आ सकते हैं।

                                 

Uttarakhandi wasi


प्रखर देशभक्त , दृढ़ स्वाभिमानी एवं अत्यंत धार्मिक उत्तराखंडी प्रवासी/ग्रामवासी  समाज अपने गांव के प्रति कदापि उदासीन नहीं हो सकता ।


उत्सवप्रिय उत्तराखंडी समाज सार्वजनिक कल्याण की गतिविधियां रामलीलाएं, कौथिक जैसे आयोजनों से देशभर में अपनी शक्रियता बना कर रखता है ।
किन्तु हम ऐसे सभी प्रवासी बंधुओं से यह भी निवेदन करते है कि इन आयोजनों से आप स्थान स्थान पर संगठित होइये किन्तु उन आयोजनों के  दूरगामी लाभ अपनी देवभूमि के पलायन से उजड़ते गांवों को होने चाहिए ,
मेरा गांव मेरा तीर्थ अभियान से जुड़ कर सामाजिक सहयोग पर आधारित ग्रामविकास के इस युगीन कार्य मे प्रत्यक्ष सहयोगी बनें  भारत माता के दिव्यभाल को उन्नत बनाये रखें तथा सहयोग , स्वावलंबन एवं स्वाभिमान की त्रिवेणी में अवगाहन करें।चलो गांव की ओर
 निवेदक
 उत्तराखंड

 

उत्तराखंड गांव ग्राम सम्मेलन चलो गांव की ओर

उत्तराखंड ग्राम सम्मेलन जून 2019 






मुझे अपने शब्दों को गहराई में लिखने का अंदाज तो मालूम नही मगर छोटी सी कोशिश है कि चंद शब्दों को अगर गहराई से सोचा जाए तो उत्तराखंड के गांव का पलायन उन बंजर पड़े मकान और खेत खलियानों को आबाद किया जा सकता है।
हम सभी की प्राथमिकता है रोजगार जो कि संभव नही और अगर रोजगार संभव नही तो क्या हम हर वर्ष में एक महीने की छुट्टी लेकर अपने गाँव मे नही रुक सकते रुकने का मकसद एक ही है कि हम सभी अपने गांव से जुड़े रहें हम जुड़ते हैं तो हमारी आने वाली पीढियां भी अपने पैतृक स्थान से जुड़ी रहेगी शायद हम कुछ इस तरह के प्रयासों पर आगे बढ़ कर भविष्य की दिशा तय कर सकते हैं।
1- सर्वप्रथम अपने गांव के प्रवासियों एवं ग्रामवासियों का एक संयुक्त  वाट्सएप ग्रुप बनाएं  तथा भावनात्मक रूप से सभी को ग्रुप से जोड़ें ।
2- सभी मिलकर ग्रामदेवता के मंदिर परिसर में प्रतिवर्ष ग्रामोत्सव मनाने के लिए निश्चित तिथि पर एकत्रित हों, इसके लिए मई -जून का महीना सबसे उपयुक्त रहेगा , प्रवासी सपरिवार ग्रामोत्सव में भाग लेने अपने गांव आएं।
3 - गांव आकर अपने ही घर पर रुकें यदि पैतृक घर जीर्ण -शीर्ण हो रहा है तो उसे प्राथमिकता के आधार पर सुविधायुक्त बनाएं ।
4- प्रवासी सामाजिक सहयोग के आधार पर अपने सामर्थ्य के अनुसार ग्रामदेवता के मंदिर  सौंदर्यीकरण में , प्राक्रतिक जल स्रोत के संरक्षण में , गरीब कन्या के विवाह में , निर्धन छात्रों की छात्रवृत्ति में , असहाय विधवाओं की सहायता आदि रचनात्मक सेवा कार्यों में अपना आर्थिक सहयोग प्रदान की परम्परा आरम्भ करें ।
स्मरण रहे संशाधनों के लिए हम लोग गांव से बाहर गए थे अब समर्थ हुए हैं तो उसका लाभ गांव को मिलना चाहिए ,धीरे धीरे अपने गांव लौटने की भी मानसिकता हमे बनानी होगी ।

5-सरकारी निर्भरता की मानसिकता के चलते भी निराशा के कारण युवाओं मेंपलायन की प्रवृत्ति  बढ़ी है जब कि अन्य प्रदेशों की श्रम शक्ति के लिए वहां पर्याप्त रोजगार है ।
ग्रामोत्सव के बाद ग्रामविकास समिति का गठन हो जो गांव की आवश्यकताओं की प्राथमिकता तय करे उस पर सभी मिल कर प्रयास करें ।अंत मे किसी एक तीर्थयात्रा को भी अपने कार्यक्रम में स्थान दें ।
हमारा प्रयास है कि एक वर्ष में 10 लाख उत्तराखण्डियों को ग्रामोत्सव के निमित्त  बुलाने की योजना का प्रयास किये जायें इससे राज्य में करोड़ों रुपयों का अदृश्य निवेश होगा स्वावलम्बन बढ़ेगा ।लौटते समय यहां के उत्पाद खरीद कर ले जाए ऐसी अपेक्षा है ।
" मेरा गांव मेरा तीर्थ "योजना के अंतर्गत प्रवासी पंचायत और ग्रामोत्सवों की श्रृंखला शुरू की जाए , इस अभियान के अनेक सुखद परिणाम मिल सकते हैं , उत्तराखंड में खाली हो रहे गांव पुनः आबाद हो सकते हैं। आइए सहयोग , स्वावलम्बन और स्वाभिमान  से हम देवभूमि को एक आदर्श राज्य के रूप में विकसित करें, पलायन को वरदान भी सावित किया जा सकता है , मात्र दृष्टिकोण बदलने की आवश्यकता है । जो यहां रुक सकते हैं वे अधिक से अधिक रुक कर  देवभूमि  के स्वर्गिक वातावरण  का असीम आनंद प्राप्त करें। ग्राम के विकास से देश का विकास है।
 
        
made youtube channel You can see the beautiful glows of Uttarakhand.The only purpose of writing this blog is that in our Uttarakhand people come here saying what are the woahs But no one wants to live in Uttarakhand This was my first blog and most of my blogs will be made on news and Uttarakhand thanks
बडोलगांव गढ़वाल एक झलक