राजा भरत की जन्म भूमि कोटद्वार का नाम कण्वनगरी। कई सालों से अपनी पहचान ढूंढ रहा है ये क्रंऋषि की नगरी

उत्तर प्रदेश के शहरों के नये नामकरण से हवा उत्तराखंड तक पहुंच चुकी है. सम्पूर्ण गढ़वाल का प्रवेश द्वार कहलाए जाने वाला कोटद्वार शहर अब जल्द ही अपने नए नाम से पहचाना जाएगा. नगर निगम कोटद्वार द्वारा नए नामकरण के इस प्रस्ताव पर मुहर भी लग चुकी है.
पौड़ी जिले के सबसे बड़े शहर कोटद्वार के नए नामकरण की तैयारी जोरों शोरों पर है. कोटद्वार शहर अब अपने नए नाम ‘कण्वनगरी कोटद्वार’ के नाम से जाना जाएगा.
नगर निगम कोटद्वार द्वारा इस फैसले पर मुहर लगाई जा चुकी है. सरकारी दस्तावेजों और साइन बोर्ड में पुराने नाम को बदले जाने की प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी है.
कोटद्वार निवासियो का कहना कि कोटद्वार को सिर्फ गढ़वाल के प्रवेश द्वार से नहीं बल्कि कण्वघाटी के नाम से भी पहचान मिलनी चाहिए. देश का नाम जिस राजा के नाम पर पड़ा है, उनका जन्म कण्वाश्रम की धरती पर ही हुआ है’
हमने कोटद्वार के कण्वाश्रम के भविष्य को लेकर अपनी एक रिपोर्ट मे बताया कि ” कोटद्वार को पिछले 70 साल में क्या मिला तो कुछ नही हमारे देश भारत का नाम इसी शहर से मिला है मगर दुर्भाग्य की बात है कि आज कोटद्वार
अपने ही देश मे पहचान का मोहताज बन गया है। अब देखना ये होगा कि क्रंऋषि शकुंतला और राजा भारत की जन्मभूमि के अपने असली नाम मिलने से यहां की आबोहवा पर क्या असर पड़ेगा.
सिर्फ शहर का नाम बदलेगा या विकास नीतियां भी.

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