जब तक जीत मिलती है तब तक हर गुनाह पर पर्दा किया जा सकता है मगर हार के साथ ही नजर आजादी है कमजोरी

आज हम बात करने जा रहे है भारतीय क्रिकेट टीम की एक हार के साथ ही यह कहना ग़लत होगा की भारतीय टीम कमजोर है। क्यूंकि उससे पहले पूरे टूर्नामेंट में सबसे बेहतरीन कोई टीम थी तो वो विराट एंड कंपनी थी मगर अचानक से ऐसा क्या हुआ कि ये टीम सेमीफाइनल में बुरी तरह से परास्त हो गई। अगर आप सोच रहे है कि ये अचानक था तो जी नहीं ये पिछले चार से पांच साल पहले से चला आ रहा है मै आप सभी को भारतीय टीम के पिछले कुछ सालों से प्रदर्शन के बारे में एक झलक दिखाने जा रहा हूं जो इसी तरह से बड़ी स्टेज में आके भारतीय टीम हार गई।

इससे पहले २०१५ में ऑस्ट्रेलिया से वर्ल्ड कप सेमीफाइनल का मुकाबला देख लीजिए वेस्टइंडीज से टी२० वर्ल्ड कप सेमीफाइनल फिर श्रीलंका से टी २० वर्ल्ड कप फाइनल भी गवाना पड़ा २०१७ में चैंपियंस ट्रॉफी का फाइनल पाकिस्तान से गवाना पड़ा और २०१९ वर्ल्ड कप सेमीफाइनल का हाल आप जानते ही है। इन सभी मुकाबलों की बात की जाए तो भारतीय टीम की बैटिंग ने अपना खेल भूल के खुद को चोकर्स की मोहर लगाने का काम किया है।

मै यह नहीं कहता भारतीय बैट्समैन कमजोर है या ये चोकर्स है मगर हालात अभी भारतीय टीम को ये सब सोचने पर मजबूर करेंगे जिस टीम में रोहित शर्मा जैसा कप्तान मौजूद होगा जिनके नाम ४ आईपीएल की ट्रॉफियां होंगी उन्हें उपकप्तान का टैग लगा कर विकेट के सामने खड़ा कर दिया जाता है बीसीसीआई कों सोचना होगा कि विराट कोहली बल्ले के साथ एक महान बल्लेबाज हैं इसे नकारा नहीं जा सकता मगर एक बल्लेबाज के साथ उनमें एक अच्छे कप्तान के गुण है भी या नहीं यह आप हाल के कुछ वर्षों में देख चुके है जब कई बार विराट के ग्राउंड में होते हुए भी धोनी और रोहित शर्मा कप्तान बन जाते हैं। बीसीसीआई को सोचना होगा कि टीम का सबसे बेहतरीन बल्लेबाज ही कप्तान नहीं बन सकता टीम में ११ खिलाड़ी होते हैं जिनमें से कोई ना कोई हकदार होता है कप्तानी का जिसमे हुनर हो रोहित शर्मा की कप्तानी के बारे में सभी जानते है। फिर भी बीसीसीआई विराट को कप्तान बना के भारतीय टीम से विश्व कप २०२३ भी दूर रखना चाहती है। रोहित शर्मा हर खिलाड़ी को बैक करते हैं और विराट कोहली बदलाव में विश्वास रखते है जो २०१९ विश्व कप में सभी ने देखा मेरा ये बिल्कुल भी मानना नहीं है कि भारतीय टीम किसी नजरिए से कमजोर है। मेरा मानना है कि यदि भारतीय टीम कमजोर है तो रणनीति के आधार पर। हमारा पिछला कुछ रिसर्च ये भी है कि जिस टीम में २८ से ३२ साल के बीच टीम होती है उस टीम के अधिक से अधिक मौके होते हैं जीतने के ये कोई तूने टोटके के बूते नहीं एक्स्पीरियंस और खेल क्रिकेट के लिए ये उम्र सबसे बेहतरीन उम्र मानी जाती है जब खिलाड़ी अपने कैरियर के सबसे बेहतरीन पड़ाव में होते है। उम्मीद करते है २०२३ में भारतीय टीम मजबूत बन के वर्ल्ड कप एक बार फिर से भारत लाए।

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